खानपान शुद्धि एवं विचारों में स्वच्छता स्थापित करें: आचार्यश्री ज्ञानसागर

“सोशल मीडिया की वास्तविक उपयोगिता एवं सामाजिक दायित्व” विषय पर वेबीनार का आयोजन

खानपान शुद्धि एवं विचारों में स्वच्छता स्थापित करें: आचार्यश्री ज्ञानसागर

9 अगस्त, 2020।। जैन पत्रकार महासंघ के तत्वावधान में महासंघ के अध्यक्ष श्रीरमेश तिजारिया की अध्यक्षता में 9 अगस्त 2020 रविवार को दोपहर 2ः00 बजे “सोशल मीडिया की वास्तविक उपयोगिता एवं सामाजिक दायित्व” विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार (ई-संगोष्ठी) का आयोजन किया गया। वेबीनार परम पूज्य सराकोद्धारक आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के मंगल सानिध्य मंे आयोजित की गयी। इस अवसर पर मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बहुत ही तार्किक है यदि उन्हें मंदिर में जाने के लिए कहा जाता है तो वह पूछती है कि मंदिर क्यों जाएं? बता दें कि मंदिर जाने से देवाधिदेव के दर्शन मात्र से नकारात्मक विचार दूर होकर सकारात्मकता में परिवर्तित हो जाते हैं। बुरे कार्यों से मन परिवर्तित होकर अच्छे कार्यों में लग जाता है। आचार्यश्री ने यह भी कहा कि अभी कोरोनावायरस काल चल रहा है इसमें हमें अनेक सावधानियां रखने की आवश्यकता है साथ ही हमें शासन प्रशासन के निर्देश का पालन करने के साथ स्वच्छता का ध्यान रखना है, खानपान शुद्धि एवं विचारों में स्वच्छता स्थापित करें। आचार्यश्री ने कहां अनुकूलताओं में तो सब काम करते हैं किंतु हमें विषम परिस्थितियों में कुछ नया कार्य करके दिखाना है। पत्रकारों की लेखनी बहुत सशक्त होती है, यह लेखनी सदैव कल्याणकारी होनी चाहिए, सकारात्मक होनी चाहिए। उन्होंने कहा इसीलिए पत्रकारिता को समाज का चैथा स्तंभ माना गया है। 

जैन दर्शन के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति विद्वान प्रो. नलिन के. शास्त्री, मगध विश्वविद्यालय बोधगया ने अपने वक्तव्य में कहा कि माध्यम तो न्यूट्रल होता है हम उसका उपयोग किस तरह करते हैं यह हमारी चेतना पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम अणु का नकारात्मक इस्तेमाल करेंगे तो नकारात्मक परिणाम प्राप्त होगा। ठीक उसी तरह सोशल मीडिया की भूमिका है, हम उसे किस तरह से इस्तेमाल करते हैं। यद्यपि समाज को संपूर्ण विश्व से जोड़े रखने के लिए सोशल मीडिया बहुत ही सशक्त माध्यम है हमें इसका उपयोग सकारात्मक दृष्टि से करना चाहिए। पंजाब केसरी, दिल्ली समाचार पत्र के अध्यक्ष स्वदेश भूषण जैन, दिल्ली ने कहा कि सोशल मीडिया में किसी प्रकार का अंकुश नहीं लगाता। जबकि प्रिंट मीडिया में संपादक एवं पत्रकार की अहम भूमिका रहती है, उसकी जिम्मेदारी होती है, इसलिए प्रिंट एवं इलेक्ट्रिक मीडिया को प्रमाणिक माना जाना चाहिए। यद्यपि सोसाल मीडिया आज की आवश्यकता है, समाज से हुडे़ रखने के लिए आवश्यक उपक्रम है। अन्र्तराष्ट्रीय जैन गणितज्ञ  एवं अर्हत वचन पत्रिका के सम्पादक प्रो. अनुपम जैन, इन्दौर ने सोशल मीडिया की उपयोगिता एवं सामाजिक दायित्व पर प्रकाश डालते हुए प़क्ष-विपक्ष दोनों पहलुओं पर चर्चा की। 

वेबीनार (ई-संगोष्ठी) में सागर (मध्य प्रदेश) के पूर्व विधायक एवं दैनिक आचरण समाचार पत्र के संपादक प्रखर वक्ता श्री सुनील जैन ने कहा कि आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के सानिध्य में यह कार्यक्रम होना अत्यंत मंगलकारी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी आचार्य ने उभरती युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित किया है तो वह आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज है। जिन्होंने सदैव युवा पीढ़ी के साथ समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ने की प्रेरणा और आशीर्वाद दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के के प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाचारों को प्रतिस्पर्धा में प्रकाशित ना करें। सोशल मीडिया समाचार एवं सूचनाओं के आदान प्रदान करने का माध्यम है इसका सदुपयोग करें। 

जैन समाज के वरिष्ठ पत्रकार एवं अग्निबाण पत्र के संपादक श्री रविंद्र जैन, भोपाल ने कहा कि आज समाज में सोशल मीडिया की बहुत ही सशक्त भूमिका रही है। किन्तु आवश्यकता इस बात की है कि खबर की पुष्टि के बिना पोस्ट ना किया जाये। क्योंकि बहुत से समाचार समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं, दंगे-फसाद एवं हिंसा का कारण भी बन जाते हैं, जबकि पत्रकारिता तो समाज का दर्पण होता है। 

जज श्री निर्मल कुमार जैन, दिल्ली ने सोशल मीडिया की उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने मीडिया की सामाजिक उपयोगिता एवं दुष्परिणाम पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज बच्चों में मोबाईल की बढ़ती लत चिन्तनीय है। आज हमारे बच्चे शारीरिक व्यायाम और खेल से दूर होकर मोबाइल तक सीमित हो रहे हैं यह आने वाले कल के लिए हानिकारक है। 

दिशा बोध पत्रिका के संपादक डॉ चिरंजीलाल बगड़ा, कोलकाता ने सोशल मीडिया की सामाजिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज हर व्यक्ति सोशल मीडिया की भूमिका में है। विश्व के प्रत्येक कोने में बैठा व्यक्ति एक दूसरे के संपर्क में है। कोरोना काल लॉकडाउन के अंतराल में हमने सोशल मीडिया के माध्यम से ही एक दूसरे से संपर्क बनाए रखा और सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया, यह इसकी उपयोगिता है। दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, हस्तिनापुर के सचिव डॉ जीवन प्रकाश जैन ने सोशल मीडिया की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया आज समाज की आवश्यकता बन गयी है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के द्वारा आज अमेरिका आदि में बैठे लोगों से वार्तालाप हो जाती है यह सोशल मीडिया की ही देन है। हमे इसके समारात्मक उपयोग से अपने जीवन का खुशहाल बनाना चाहिए। 

इस अवसर पर देश के जाने माने वक्ता एवं साहित्यकार श्री राजेंद्र महावीर, सनावद ने अपने उद्बोधन में कहा की समाज में पत्रकारों की अहम भूमिका होती है। इसलिए जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। किसी भी खबर को प्रसारित करने से पहले उसके सकारात्मक एवं नकारात्मक परिणाम पर विचार किये बिना प्रसारित न करें। उन्होंने यह भी कहा कि जैन समुदाय के पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है वह इसलिए कि जैनियों की बात पर समाज भरोसा करता है और उनके द्वारा प्रेषित खवर पर विश्वास करके अन्यत्र भेज देता है। हमें अपनी गुडविल को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि घर को सोशल मीडिया फ्री जोन बनाने की आवश्यकता है। जैन समाज के युवा साहित्यकार एवं प्रसांगिक लेखक डॉ. सुनील संचय, ललितपुर ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज बच्चों की मोबाइल के प्रति बढ़ती ललक चिंतनीय है। यह मोबाइल के प्रति बढ़ता राग नशे की लत से भी दुश्कर है। अभिभावकों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। पारुल जैन, इंदौर ने भी विचार व्यक्त किए तथा सोशल मीडिया से जुड़े

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